शेयर मार्केट में Volume की पूरी समझ – क्यों हर ट्रेडर को इसे देखना ज़रूरी है
शेयर मार्केट में ज्यादातर लोग सिर्फ यह देखते हैं कि शेयर का भाव ऊपर जा रहा है या नीचे। लेकिन सच्चाई यह है कि केवल price देखकर ट्रेड करना अधूरी जानकारी के आधार पर फैसला लेना है। किसी भी मूव की असली ताकत Volume बताती है।
अगर price गाड़ी है तो volume उसका इंजन है। गाड़ी दिखने में तेज लग सकती है, लेकिन इंजन में दम नहीं होगा तो वह ज्यादा दूर नहीं जाएगी। ठीक यही बात शेयर मार्केट पर लागू होती है।
इस लेख में हम step-by-step समझेंगे कि Volume क्या होती है, Number of trades से कैसे अलग है, इसे चार्ट में कैसे देखें, और कितना volume होने पर मूव को गंभीर माना जाता है।
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Volume क्या होती है?
Volume का मतलब है किसी निश्चित समय अवधि (जैसे 1 दिन, 1 घंटा या 5 मिनट) में खरीदे और बेचे गए कुल शेयरों की संख्या।
उदाहरण के लिए, अगर आज किसी शेयर के 10 लाख शेयरों की खरीद-फरोख्त हुई, तो आज का volume 10 लाख है। यह हमें बताता है कि उस शेयर में कितनी भागीदारी हो रही है।
Price हमें दिशा बताता है, लेकिन volume बताता है कि उस दिशा में कितनी ताकत है।
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Number of Trades और Volume क्या एक ही चीज़ हैं?
नहीं, ये दोनों अलग हैं और बहुत लोग यहाँ गलती करते हैं।
Volume का मतलब है कुल शेयरों की संख्या जो खरीदे-बेचे गए।
Number of trades का मतलब है कितनी बार सौदा हुआ।
मान लीजिए तीन लोगों ने ट्रेड किया। पहले ने 100 शेयर खरीदे, दूसरे ने 200 और तीसरे ने 10,000 शेयर खरीदे। यहाँ trades सिर्फ 3 हुए, लेकिन volume 10,300 शेयर हो गया।
इससे समझ आता है कि कम trades में भी बड़ा volume बन सकता है, अगर बड़े खिलाड़ी (big players) शामिल हों।
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Volume देखना क्यों जरूरी है ?
Volume मार्केट की गंभीरता दिखाता है। यह बताता है कि जो price मूव हो रहा है, वह असली है या सिर्फ दिखावा।
अगर कोई शेयर 4–5% ऊपर चला गया लेकिन volume बहुत कम है, तो यह मूव टिकाऊ नहीं हो सकता। लेकिन अगर वही मूव भारी volume के साथ हो, तो समझिए कि मजबूत खरीदारी हो रही है।
Volume हमें यह भी संकेत देता है कि बड़े संस्थागत निवेशक (Mutual Funds, FIIs, बड़े ट्रेडर) शेयर में सक्रिय हैं या नहीं। जब volume अचानक बढ़ता है, तो अक्सर इसके पीछे बड़े पैसों की एंट्री या एग्जिट होती है।
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Price बढ़े और Volume भी बढ़े – सबसे मजबूत संकेत -
जब शेयर का भाव ऊपर जा रहा हो और साथ ही volume भी बढ़ रहा हो, तो यह healthy uptrend माना जाता है। इसका मतलब है कि खरीदार लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों को उस शेयर में भरोसा है।
ऐसी स्थिति में breakout टिकने की संभावना ज्यादा होती है और ट्रेंड आगे जारी रह सकता है।
सरल भाषा में: Price ऊपर + Volume ऊपर = मजबूत तेजी का संकेत।
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Price बढ़े लेकिन Volume घटे – सावधान हो जाइए
अगर शेयर ऊपर तो जा रहा है लेकिन volume धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, तो यह खतरे का संकेत है। इसका मतलब है कि खरीददार कम हो रहे हैं और कुछ हल्की खरीद से price ऊपर धकेला जा रहा है।
ऐसे ट्रेंड में अक्सर अचानक गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि मजबूत सपोर्ट नहीं होता।
Price ऊपर + Volume नीचे = कमजोर तेजी।
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Price गिरे और Volume बढ़े – तेज गिरावट का संकेत
जब शेयर नीचे गिरता है और volume बढ़ जाता है, तो इसका मतलब है कि लोग डरकर बेच रहे हैं या बड़े खिलाड़ी निकल रहे हैं। यह panic selling भी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में गिरावट और तेज हो सकती है क्योंकि बेचने वालों की संख्या ज्यादा है।
Price नीचे + Volume ऊपर = मजबूत गिरावट का संकेत।
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Volume चार्ट में कैसे देखें?
हर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (जैसे Zerodha, Upstox, TradingView) में price chart के नीचे खड़ी लाइनें (bars) दिखाई देती हैं। यही volume bars होती हैं।
हर कैंडल के नीचे एक volume bar होती है। बार जितनी लंबी होगी, उस समय उतना ज्यादा volume ट्रेड हुआ है।
अक्सर हरा रंग खरीदारी ज्यादा होने का संकेत देता है और लाल रंग बिकवाली ज्यादा होने का, लेकिन असली बात bar की ऊँचाई है — वही volume की ताकत दिखाती है।
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Average Volume क्या होता है?
हर शेयर का रोज का volume अलग होता है। इसलिए सिर्फ आज का volume देखकर फैसला लेना सही नहीं। इसके लिए average volume देखा जाता है, जो आमतौर पर पिछले 20 दिनों का औसत होता है।
यह हमें बताता है कि उस शेयर में सामान्य दिनों में कितनी ट्रेडिंग होती है। आज का volume इस औसत से कितना ज्यादा या कम है, वही असली संकेत देता है।
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कितना Volume “सीरियस” माना जाए?
यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
अगर volume लगभग average के बराबर है, तो दिन सामान्य माना जाता है।
अगर volume लगभग डेढ़ गुना है, तो हल्की एक्टिविटी बढ़ी है।
अगर volume 2 गुना है, तो यह ध्यान देने लायक मूव है।
अगर volume 3 गुना या उससे ज्यादा है, तो समझिए कि बड़े प्लेयर सक्रिय हैं और मूव गंभीर है।
अगर volume 5 गुना या उससे भी ज्यादा हो जाए, तो अक्सर बड़ी खबर, रिजल्ट या संस्थागत खरीद-बिक्री होती है।
किसी breakout को मजबूत तभी माना जाता है जब volume कम से कम 2 से 3 गुना average से ज्यादा हो।
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Breakout में Volume की भूमिका
जब शेयर किसी महत्वपूर्ण resistance को तोड़ता है, तो volume बहुत अहम हो जाता है।
अगर breakout छोटे volume पर हुआ है, तो यह फंसाने वाला मूव हो सकता है और शेयर वापस नीचे आ सकता है।
लेकिन अगर breakout बड़े volume के साथ हो, तो यह संकेत देता है कि बड़े खिलाड़ी खरीद रहे हैं और breakout टिक सकता है।
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Trend Confirmation में Volume की भूमिका
कोई भी ट्रेंड सिर्फ price से confirm नहीं होता। Volume उसे मजबूत या कमजोर साबित करता है।
एक मजबूत uptrend में हर नई तेजी के साथ volume बढ़ना चाहिए।
Downtrend में गिरावट के दौरान volume बढ़ना चाहिए।
अगर शेयर लंबे समय तक एक रेंज में घूम रहा है, तो volume आमतौर पर कम रहता है — इसे consolidation कहते हैं।
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Volume Spike क्या होता है?
जब अचानक किसी दिन volume बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और सामान्य से कई गुना हो जाता है, तो इसे volume spike कहते हैं।
यह अक्सर तीन कारणों से होता है:
कंपनी से जुड़ी बड़ी खबर,
किसी बड़े निवेशक की एंट्री या एग्जिट,
या फिर ऑपरेटर की एक्टिविटी।
Volume spike के बाद अक्सर शेयर में बड़ा मूव देखने को मिलता है।
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Delivery Volume क्यों महत्वपूर्ण है?
कुल volume में से कुछ ट्रेड intraday होते हैं (उसी दिन खरीदे-बेचे जाते हैं) और कुछ delivery में जाते हैं (लोग शेयर खरीदकर अपने Demat में रखते हैं)।
अगर delivery percentage ज्यादा है, तो इसका मतलब है लोग शेयर को होल्ड करने के इरादे से खरीद रहे हैं। यह लंबे समय के लिए ज्यादा सकारात्मक संकेत माना जाता है।
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Volume Dry Up क्या होता है?
जब किसी शेयर में volume बहुत कम हो जाता है, तो इसे volume dry up कहते हैं।
यह अक्सर दो स्थितियों में होता है:
या तो बेचने वाले लगभग खत्म हो चुके होते हैं (जिसके बाद शेयर में उछाल आ सकता है),
या फिर मार्केट बड़ी चाल से पहले शांत हो रहा होता है।
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Support और Resistance पर Volume
अगर शेयर support के पास है और वहाँ भारी volume के साथ खरीदारी हो रही है, तो support मजबूत माना जाता है।
अगर शेयर resistance के पास है और वहाँ भारी volume के साथ बिकवाली हो रही है, तो resistance मजबूत है।
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Fake Breakout से बचने में Volume की मदद
बहुत बार शेयर resistance के ऊपर जाता है और लोग जल्दी में खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में price वापस नीचे आ जाता है। इसे fake breakout कहते हैं।
Fake breakout में आमतौर पर volume कम होता है।
Genuine breakout में price के साथ volume भी तेज़ी से बढ़ता है।
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Long Term Investor के लिए Volume क्यों जरूरी?
सिर्फ ट्रेडर ही नहीं, निवेशक के लिए भी volume महत्वपूर्ण है।
Volume से पता चलता है कि किसी शेयर में धीरे-धीरे accumulation (बड़ी खरीदारी) हो रही है या distribution (धीरे-धीरे बिकवाली)।
स्मार्ट मनी यानी बड़े निवेशकों की चाल अक्सर volume से पहले दिखाई देती है, price बाद में मूव करता है।
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अंतिम निष्कर्ष
शेयर मार्केट में सिर्फ price देखकर निर्णय लेना अधूरी समझ है। Volume वह सच्चाई है जो price के पीछे छिपी होती है।
Volume बताता है कि मूव में दम है या नहीं, बड़े खिलाड़ी शामिल हैं या नहीं, breakout असली है या फेक, और ट्रेंड टिकेगा या टूटेगा।
याद रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात:
बिना मजबूत volume के किसी भी price मूव पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।
जब आप price और volume दोनों को साथ में पढ़ना सीख जाते हैं, तब आपकी ट्रेडिंग समझ एक नए स्तर पर पहुंच जाती है। यही अंतर है भीड़ के साथ ट्रेड करने वालों और समझदारी से ट्रेड करने वालों में।

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